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Home > Relief Work > गुजरात भूकंप राहत कार्य - 2001

घटना की तारीख: 26  जनवरी 2001

समय: 8:46

परिमाण रिक्टर पैमाने पर 6.9

Epicenter: 23.6 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 69.8 डिग्री पूर्वी देशांतर

भुज से 20 किलोमीटर उत्तर पूर्व में 110 किलोमीटर दूर जामनगर के उत्तर नॉर्थ ईस्ट.

दिनांक- 27-01-2001 को शान्तिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का एक दल अहमदाबाद के लिए रवाना हुआ, नौ कार्यकर्त्ता भचाऊ पहुँचे व दो मोरबी एवं महिया पहुँचे और मौके पर ही आई हुई आपदा का निरिक्षण किया।
दिनांक 29-01-2001 को बंसत पर्व का शुभ दिन था। श्रीमती शैल दीदी, डॉ॰ प्रणव पंड्या व शान्तिकुंज में बसंत पर्व मनाने के लिए एकत्र हुए, हजारों परिजनों ने आपदा पीडि़तों को श्रद्धांजलि अर्पित की, एक दिन का उपवास रखा व एक दिन का वेतन आपदा राहत कार्य के लिए समर्पित किया। पहले चरण में 24 लाख रुपये व आवश्यक वस्तुओं का तत्काल दान का संकल्प किया गया था।

29-01-2001 को श्रीमति शैल दीदी व डॉ॰ प्रणव पंड्या जी की अध्यक्षता में मिशन के ५०० स्वयंसेवक कार्यकर्ताओं का एक दल, शान्तिकुंज के श्री जयंती भाई पटेल व बसंती भाई पटेल, गुजरात गायत्री परिवार के अरविन्द भाई पटेल, सतीश भाई, डॉ॰ बी॰ टी॰ पटेल, मंगल भाई पटेल, सुरेश मेहता, हेमराज त्रिवेदी के साथ भचाऊ पहुँचे, शान्तिकुंज के प्रबंधक श्री गौरीशंकर जी शर्मा, जिनकों कि राहत कार्यों का प्रभारी बनाया गया, दिनांक 30-01-2001 को भचाऊ पहुँचे, प्रथम वरीयता सामग्री, दवाएँ, कंबल, चादरें, कपडे़ बर्तन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए दिया गया था,

द्वितीय चरण में 40000 से अधिक प्लास्टिक टेंट की आपूर्ति की गयी। एक लाख से अधिक टेंट खरीदे गए थे। आपदा पीडि़तों के पुनर्वास व आत्मनिर्भर बनाने के लिए 20000 से अधिक डोम के आकार के घरों का निर्माण प्रस्तावित किया गया था। केंद्रीय दल, जो कि गुजरात में डेरा डाले हुए था, सक्रिय रूप से पुनर्वास कार्य में लगे हुए थे।

तृतीय चरण में, दिनांक 07-02-2001 से नित्य, प्रार्थनाएं अर्पित की गयीं व दिवंगत आत्माओं की शांति व मोक्ष के लिए श्राद्ध तर्पण की क्रियाएं संपन्न की गयीं। 56 अन्य गाँवों को कम्बल, चादरें, अनाज, दवाई, जल और खाद्य सामग्री की आपूर्ति की गयी। भचाऊ शिविर में कार्यरत 9000 स्वयंसेवकों को नियमित भोजन की आपूर्ति की गयी, इन में सरकारी अधिकारी व अन्य संस्थाओं के स्वयंसेवक भी शामिल थे।

यह उल्लेखनीय है कि 56 सदस्यों का दल जो कि यूक्रेन (रूस) से आया था, को भी इस शिविर के द्वारा खाद्य आपूर्ति की गयी। श्री गौरीशंकर शर्मा, डॉ॰ अमल कुमार दत्ता, श्री गौरीशंकर सैनी ने यूक्रेन टीम के सदस्यों के साथ संपर्क स्थापित किया और जरूरत पड़ने पर गायत्री परिवार द्वारा सभी आवश्यक सेवा प्रदान करने का आश्वासन दिया, मीडिया ने गायत्री परिवार के द्वारा की गयी सेवाओं के साथ सक्रिय सहयोग किया। जी टी॰ वी॰ के हिंदी चैनल ने दिनांक 09-02-2001 को इस सम्बन्ध में मुख्य समाचार प्रस्तुत किये थे। दूरदर्शन ने दिनांक 10-02-2001 को रात्रि 10 बजकर 5 मिनट पर विशेष बुलेटिन में साक्षात्कार प्रसारित किया था। गायत्री परिवार द्वारा प्रदान की गयी सेवाओं को टाइम्स ऑफ इंडिया, सन्देश इंडिया टुडे, अकिला, संध्या समाचार, जनसत्ता, फुलचाब और अन्य समाचार पत्रों ने सराहना की। जैन टी॰ वी॰ आज तक, चित्रलेखा, अभियान ने भी सराहना की। रायपुर, भुज,

मोरबी महिया केंद्र - २४ गाँव लाभान्वित-

११४ बैग चीनी, ८८ बक्से तेल, ३६३ बैग आटा, १० बैग दालें, १९५ बैग चावल, ९३ डिब्बा गुड़, ५२० बैग आलू (१०० किलोग्राम प्रत्येक), ३५ बैग बाजरा (१०० किलोग्राम प्रत्येक), ११ बैग नमक, ४००/१००० रजाई/कंबल, २५ किलोग्राम चाय, ५००० तालपत्री। १००० बर्तनों का सेट गायत्री परिवार सूरत ने मोरबी शक्ति पीठ को वितरण के लिए दिए। २८ संसाधन हीन महिलाओं को जो कि अशोक भाई प्लेस, पिपलिया में काम करने आयीं थी, साडी़ और कपडे़ दिए गए।

अंजड़ केन्द्र - २५ गाँव लाभान्वित -

१५०० किलोग्राम चीनी, ५०० किलो तेल ४०० बैग आटा, २००० किलो दाल, ५०० बैग चावल, २५ डिब्बा गुड़,२५ बैग आलू (१०० किलोग्राम प्रत्येक), १२५ बैग प्याज, २५ बैग बाजरी, रजाई/कंबल ५०००/५०००, २० किलो चाय, ५००० तालपत्री। उपलब्ध करायी गयी चिकित्सा सेवा में, उत्तरांचल और शांतिकुंज से डॉक्टरों की भूमिका सराहनीय थी। ५६ हड्डी रोग आपरेशन संपन्न किये गए

भचाऊ केन्द्र - ३५ गाँव लाभावन्वित-

३०० बैग चीनी, २ ट्रक लोड तेल, ८०० बैग आटा, २५० बैग दाल, ८०० बैग चावल, १५० डिब्बा गुड़, २०० बैग आलू (१०० किलोग्राम प्रत्येक), ५० बैग नमक, रजाई/कम्बल २०००/३०००, ५० किलो चाय, २०,००० तालपत्री। १ से लेकर ७ तक की कक्षाएं शान्तिकुंज के स्काउट व गाइड दल अमरदी में शुरु की। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भूकंप के बाद स्कूल में अध्यापन शुरू करने वाला गायत्री परिवार एक पहला संगठन है।

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