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Home > Relief Work > केदारनाथ - उत्तराखंड अतिवृष्टि और बाढ आपदा जून - 2013

१६-१७ जून को अतिवृष्टि और बाढ के परिणाम स्वरूप उत्तराखंड के केदारनाथ, गंगोत्री आदि क्षेत्र में बादल फटने से  हुई भारी तबाही के समय शांतिकुंज के  आपदा प्रबंधन ने अविलम्ब राहत कार्य आरम्भ किया ।

प्रशासन की अपील पर शांतिकुंज व्यवस्था की आपात बैठक हुई। जिसमें राहत सामग्री शीघ्र भेजने का निर्णय हुआ। लगभग ७५००० खाने के पैकेट्स आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचाये गये। इनमें से सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा लगभग ४०,००० पैकेट्स आपदा प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में पहुँचाये गये।

शांतिकुंज की अधिष्ठात्री शैल दीदी एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने बाढ़ पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उत्तराखंड त्रासदी से पीड़ितों के दर्द को बँटाते हुए गायत्री परिवार ने अब तक सवा करोड़ रुपये की राहत सामग्री का वितरित किया है। इसमें भोजन के पैकेट, नाश्ता के पैकेट, राशन किट, बर्तन किट, तिरपाल, कंबल, स्टोव, सोलर लालटेन, टॉर्च, कपड़े, पानी, पशुओं हेतु चारा आदि सामग्री शामिल हैं।
गायत्री परिवार उत्तराखंड के पूर्ण अध्यात्मीकरण हेतु कटिबद्ध रहेगा एवं प्रयास करेगा कि पुनर्वास- प्रबंधन द्वारा उत्तराखंड को ही नहीं, पूरे हिमालय क्षेत्र को आपदा मुक्त एवं तपोभूमि जैसा बना सकें।  उत्तराखंड के चयनित गाँवों में पीड़ितों के मकान, स्कूल, स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक भवनों के निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है।
शांतिकुंज आपदा प्रबंधन दल ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन के ५ हजार पैकेट  तथा ५०० कम्बल तुरंत भेजे। रास्ता अवरुद्ध होने के कारण इसे प्रशासन हेलीकाप्टर के सहयोग से बाढ़ पीड़ितों तक पहुँचाया।

१९ जून को शांतिकुंज का आपदा प्रबंधन दल रवाना हुआ, जो कर्णप्रयाग व रुद्रप्रयाग में दस हजार क्षमता वाले नि:शुल्क भोजनालय चलाया।

बादल फटने की इस विकट परिस्थिति में गायत्री परिवार की स्थानीय शाखाओं के सैकड़ों लोगों के सहयोग से शांतिकुंज का आपदा प्रबंधन दल ने राहत कार्य आरंभ किया। गायत्री परिवार के परिजन ने आपदा की इस घड़ी में सदैव की भाँति बढ़चढ़ कर सहयोग प्रदान किया।

1. 23-June - बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री लेकर पाँचवाँ दल रवाना .
2. 26 June - आचार्य श्रीराम शर्मा जन्मशताब्दी चिकित्सालय में आपदा प्रभावितों के चिकित्सा की पूरी सुविधा जुटाई गई। आवश्यकतानुसार मनोवैज्ञानिक परामर्श की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गयी है।
3. लगभग ३०० कम्बल, २५००० पैकेट मोमबत्ती एवं माचिस पुन: वितरित।
4. शान्तिकुञ्ज का आपदा प्रबंधन कोष्ठ २४ घण्टे खुला और उत्तराखण्ड आपदा राहत विभाग तथा सचिवालय देहरादून के लगातार सम्पर्क में रहा।
5. १८ जून को एनडीआरएफ के २५० जवान राहत कार्यों में मदद के लिए नई दिल्ली से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाने से पूर्व रात शान्तिकुञ्ज रुके।

यात्रियों के अलावा स्थानीय लोगों की जान माल को भारी क्षति पहुँचती है और उनकी विपत्ति अधिक बड़ी है। राहत एवं पुनर्वास के लिए शान्तिकुञ्ज न केवल क्षेत्र विशेष पर ध्यान दे रहा है, बल्कि कई गाँवों को गोद लेकर, तीर्थों को गोद लेकर उनके पुनर्वास की योजना हम बना रहे हैं।

शांतिकुंज ने अब तक बाँटी सवा करोड़ की राहत सामग्री अगले छः माह तक चलेगा यह अभियान

आपदा में उजड़े गाँवों को फिर से बसायेगा शांतिकुंज

शांतिकुंज ने पूरा किया नौ जिलों में आपदा राहत कार्य का प्रथम चरण :

सुरक्षित हिमालय व चारधाम देने का संकल्प लें युवा - डॉ. प्रणव पण्ड्या

भवन निर्माण का सामान लेकर शांतिकुंज का आपदा राहत दल रवाना !

आपदा राहत दल जेटीमल्ली में मकान बनाने हेतु रवाना !

मकान निर्माण हेतु समान की चौथी खेप रवाना- अगस्त्यमुनि के दो स्कूलों का पुनर्निर्माण कर रहा है शांतिकुंज

केदारनाथ क्षेत्र में नि:शुल्क भोजनालय चलाकर लौटी शांतिकुंज की टोली

शांतिकुंज ने भेजा छठवाँ पुनर्वास राहत दल, तीन वाहन में 17 मकान बनाने हेतु सामग्री लेकर गया दल !


निर्मल गंगा अभियान के तहत पहल से ही पूरी गंगा को शुद्ध करने का हमारा पाँच वर्षीय कार्यक्रम है। अब इसे हम गंगोत्री से हरिद्वार के बीच ही पहले तीन साल सघन रूप से चलायेंगे।
शान्तिकुञ्ज से होकर चार धाम जाने वाले हजारों यात्रियों को हिमालय की चेतना में स्नान कराकर ही भेजा जाता है। उन्हें हिमालय की आध्यात्मिक महत्ता, पर्यावरण आदि के बारे में जागरूक कराया जाता है, जिससे वे इसे आम पर्यटन जैसा न लेकर तीर्थयात्रा का सही लाभ उठा सकें। आगे इस कार्यक्रम को और गति दे रहे हैं।
Report till 29th Aug 2013


उत्तरकाषी-डिडसारी, मनेरी, हिना, सेंज, कुमाल्टी, सौरा, सारी, सालू व स्याबा-7 गांव

दिनांक 12 जुलाई 2013 को केंद्रीय पर्यवेक्षक दल का शांतिकंज आगमन -श्री सतेन्द्र, अधिषासी निदेशक, राषट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के नेतृत्व में पाच सदस्यीय दल द्वारा शांतिकंज के राहत कार्यों का निरीक्षण किया। केन्द्रीय टीम ने राहत कार्य की सुचारुरूप से चलायी जा रही संचालन प्रक्रिया को जानने की विषेश जिज्ञासा दिखाई। केंद्रीय टीम ने आदरणीया जीजी, आदरणीय डा.साहव व आद गौरीशकर भाईसाहब से विस्तार पूर्वक चर्चा की।

दिनांक 15 जुलाई को देहरादून में मानवधिकार अन्वेशक के केंद्रीय दल के साथ गोश्ठी- मानवाधिकार अन्वेशक की महानिदेषक श्रीमती कंवलजीत सिंह कौर की टीम के साथ सक्रिय स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ उत्तराखण्ड के आपदा राहत कार्यों की समीक्षा की। इस गोषठी में गायत्री परिवार, रामकृश्ण मिशन, जैन आश्रम, मैक्स फाउंडेशन, भरत मंदिर, आर्ट आफ लिविंग, निरंकारी भवन, हिमालयन हास्पिटल
ट्रस्ट-जालीग्राण्ट के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
शान्तिकुञ्ज से आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षण प्राप्त लगभग ९० लोग विभिन्न स्थानों पर राहत कार्य में सेना और प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।

डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टॉफ  के साथ शान्तिकुञ्ज की टीम विभिन्न क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा एवं दवाईयाँ पहुँचाने निकली ।

जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रूड़की कार्यालय ने १,००,०००.०० मूल्य की राहत सामग्री शान्तिकुञ्ज को उपलब्ध कराई है।

भारत भर से लाखों गायत्री परिजन ने अपनी न्यूनतम एक दिन की आमदनी शान्तिकुञ्ज के आपदा राहत कोश में जमा। यूके, यूएस, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, फिजी आदि देशों से भी गायत्री परिजन सहायता हेतु तत्पर ।

शान्तिकुञ्ज के लगभग १५०० स्वयंसेवक इस समय भोजन तैयार करने, पैकिंग करने, प्रभावित यात्रियों को ठहराने आदि कार्यों में संलग्न थे।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या के नेतृत्व में २३ जून से देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के १८० छात्र, छात्राएँ अपने इंटर्नशिप कार्यक्रम के अन्तर्गत आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए रवाना।
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